आरबीआई ने रेपो रेट बढ़ाकर 6.25% की

6 जून, 2018 को, आरबीआई की छह सदस्यी मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट (अल्पकालिक उधार दर) को 6.00% से बढ़ाकर 6.25% करने का फैसला लिया है. दूसरी द्वि-मासिक मौद्रिक नीति के अनुसार, आरबीआई की वर्तमान रेपो रेट 6.25% जबकि रिवर्स रेपो रेट 6.00% है. हाल ही में हुई दरों में यह वृद्धि मई, 2014 में एनडीए (National Democratic Alliance) सरकार के गठन के बाद से साढ़े चार सालों में पहली बार देखी गई है.

रेपो दर

रेपो दर, वह दर है जिस पर आरबीआई छोटी समयावधि के लिए बैंकों को ऋण देता है. यह RBI द्वारा बैंकों से सरकारी बांड खरीदकर एक निश्चित दर पर उन्हें बेचने के लिए एक समझौते के साथ किया जाता है. जब भारतीय रिजर्व बैंक रेपो दर बढ़ाता है, तो बैंक को उच्च दरों पर ऋण देना पड़ता है. अत: कहा जा सकता है, कि रेपो दर का बढ़ना बाजारों में ब्याज दरों में वृद्धि होने का एक कारण है.

रिवर्स रेपो दर

रिवर्स रेपो दर वह ब्याज दर है जिस पर आरबीआई अल्पकालिक समय के लिए अन्य बैंकों से ऋण लेता है. यह आरबीआई द्वारा सरकारी बॉन्ड / सिक्योरिटीज को बैंकों को भविष्य में वापस खरीदने की प्रतिबद्धता के साथ किया जाता है. बैंक रिवर्स रेपो सुविधा का उपयोग अपने अल्पकालिक अतिरिक्त धन को आरबीआई में जमा करके ब्याज अर्जित करने के लिए भी करते हैं.

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