इम्पैक्ट बेस्ड फोरकास्टिंग एप्रोच: मौसम विभाग ने नदियों में बढ़े हुए जलस्तर का अनुमान लगाने के लिए विकसित की नवीन तकनीक

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग “इम्पैक्ट बेस्ड फोरकास्टिंग एप्रोच” नामक नवीन तकनीक का विकास किया है, इस तकनीक की सहायता से नदियों व जलाशयों में वर्षा के दौरान बढ़े हुए जलस्तर का अनुमान लगाने में सहायता मिलेगी। इसकी सहायता से सरकारी एजेंसियों को वर्षा के प्रभाव को सूक्ष्मतापूर्वक मापने में सहायता मिलेगी और वे समय पर निर्णय ले सकेंगीं। इससे केरल की तरह भयानक स्थितियों से बचा जा सकता है। इस तकनीक की सहायता से जलाशय से समय पर पानी छोड़ने का फैसला लिया जा सकता है।

पृष्ठभूमि

अगस्त 2018 में केरल में भारी वर्षा के कारण लगभग 500 लोगों की मृत्यु हुई और लगभग 40,000 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। केरल में यह भारी वर्षा जलवायु परिवर्तन का सूचक था। भारतीय मौसम विभाग ने 9 से 15 अगस्त, 2018 के बीच केरल में 98.5 मिमी वर्षा का पूर्वानुमान लगाया था, परन्तु इस अवधि के दौरान केरल में 352.2 मिमी वर्षा हुआ, जिस कारण केरल में भयानक बाढ़ आई।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत भारत सरकार के मौसम विज्ञान प्रक्षेण, मौसम पूर्वानुमान और भूकम्प विज्ञान का कार्यभार सँभालने वाली भारतीय मौसम विज्ञान विभाग एक सरकारी एजेंसी है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। भारत से लेकर अंटार्कटिका भर में सैकड़ों प्रक्षेण स्टेशन भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के द्वारा वर्त्तमान में चलाये जाते हैं।

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