केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने वायरल हेपेटाइटिस की रोकथाम तथा नियंत्रण पर एकीकृत पहल हेतु निर्णय लिया

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने वायरल हेपेटाइटिस की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत एकीकृत पहल शुरू करने का निर्णय लिया है। इस पहल में तीन साल के लिए 517 करोड़ रुपये से अधिक का बजटीय समर्थन होगा। भारत 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्य तथ्य

इस पहल के तहत, मंत्रालय सभी राज्यों में अगले तीन वर्षों की अवधि के दौरान 100 उपचार और 665 परीक्षण केंद्रों को बढ़ाएगा। यह निगरानी, जागरूकता , टीकाकरण, सुरक्षित रक्त, इंजेक्शन सुरक्षा संक्रमण नियंत्रण, वायरल हेपेटाइटिस का निदान, क्षमता निर्माण, अनुसंधान और निगरानी जैसे घटकों को कार्यान्वित करेगा। 15 मॉडल उपचार केंद्र स्थापित करने का भी प्रस्ताव है, जो हेपेटाइटिस सी के निदान और उपचार के लिए रेफरल केंद्र के रूप में कार्य करेगा तथा क्षमता निर्माण में सहायता करेगा।

वायरल हेपेटाइटिस

हेपेटाइटिस का अर्थ यकृत की सूजन से है। यकृत शरीर का महत्वपूर्ण अंग है जो पोषक तत्वों को संसाधित (Processes)करता है, रक्त फ़िल्टर करता है, और संक्रमण से रक्षा करता है। जब वायरल हेपेटाइटिस या क्षतिग्रस्त होने के कारण यकृत में सूजन हो जाती है, तो इसके कार्य प्रभावित होते हैं। हेपेटाइटिस अक्सर वायरस के कारण होता है और वायरल हेपेटाइटिस के अधिकांश सामान्य प्रकार हेपेटाइटिस ए, हेपेटाइटिस बी, और हेपेटाइटिस सी होते हैं। वायरल हेपेटाइटिस को दुनिया भर में सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में पहचाना जाता है। भारत 2030 तक इसे समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। अधिक शराब का उपयोग, विषाक्त पदार्थ, कुछ दवाएं, और कुछ गंभीर चिकित्सीय स्थितियां हेपेटाइटिस का कारण बन सकती हैं।

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