केंद्र सरकार ने गेहूं आयात शुल्क में 40% की बढ़ोत्तरी की

रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन के चलते सरकार ने गेहूं आयात शुल्क को 30% से बढ़ाकर 40% कर दिया है। यह स्थानीय किसानों के लिए काफी लाभदायक है। गेहूं के आयात शुल्क में वृद्धि होने से देश में ही उत्पादित गेहूं का विक्रय अधिक होगा और किसानों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। बम्पर उत्पादन होने के कारण गेहूं की कीमतों पर काफी दबाव है।

मुख्य बिंदु

2018-19 फसल वर्ष (जुलाई से जून) में 2018 के मुकाबले गेहूं के उत्पादन में 2% की वृद्धि हुई है और यह उत्पादन बढ़कर 99.12 मिलियन टन पर पहुँच गया है।

सरकार के गेहूं स्टॉक का प्रबंधन करने वाले भारतीय खाद्य कारपोरेशन (FCI) के पास अप्रैल में 16.99 मिलियन टन गेहूं का स्टॉक उपलध है, मई के अंत तक सरकार की अगली खरीद के बाद यह स्टॉक 57 मिलियन टन तक पहुँच सकता है।

बम्पर उत्पादन

किसानों की आय में वृद्धि करने के लिए सरकार गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 6% की वृद्धि की है (2019 के लिए 1,840 रुपये प्रति 100 किलोग्राम)।

2018 में केंद्र सरकार ने गेहूं के आयात शुल्क को 20% से बढ़ाकर 30% कर दिया था, जिससे गेहूं के आयात में काफी कमी आई।

इससे पहले भारत ऑस्ट्रेलिया, यूक्रेन और रूस से गेहूं का आयात करता था। अब गेहूं के आयात शुल्क में 40% वृद्धि होने के कारण विदेशों से आयात की जाने वाली गेहूं अत्याधिक महंगी हो जायेगी। जिसके परिणामस्वरूप भारत में ही उत्पादित गेहूं के विक्रय में वृद्धि होगी।

भारत में गेहूं का सर्वाधिक उत्पादन उत्तर प्रदेश में किया जा है, इसके अलावा पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश में भी गेहूं का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जाता है। चीन विश्व का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है, इसके बाद भारत, रूस और अमेरिका का स्थान आता है।

भारतीय खाद्य कारपोरेशन (FCI)

भारतीय खाद्य कारपोरेशन एक वैधानिक गैर-लाभकारी संगठन है, इसका संचालन भारत सरकार तथा राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है। इसका गठन 1965 में खाद्य कारपोरेशन अधिनियम, 1964 के तहत किया गया था। इसका गठन राष्ट्रीय खाद्य नीति के उद्देश्यों के क्रियान्वयन के लिए किया गया था। शुरू में इसका मुख्यालय चेन्नई में स्थित था जिसे बाद में नई दिल्ली स्थानांतरित किया गया।

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