गांधी-किंग एक्सचेंज एक्ट क्या है?

अमेरिका की कांग्रेस कमेटी ने हाल ही में वर्ष 2009 में अमेरिकी नागरिक अधिकार नेता और कानूनविद् जॉन लुईस की भारत यात्रा से प्रेरित एक विधेयक पारित किया है। श्री लुईस ने डॉ. मार्टिन लूथर किंग जूनियर की भारत यात्रा की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर भारत का दौरा किया था। श्री लेविस द्वारा लिखित इस बिल को  कांग्रेस समिति द्वारा 29 जुलाई को मंज़ूरी दी गयी। हालांकि, इस विधेयक को कानून बनने से पहले सदन और सीनेट से पारित करना होगा।

मुख्य विशेषताएं

गांधी की 150वीं जयंती को चिह्नित करते हुए, यह बिल महात्मा गांधी और मार्टिन लूथर किंग जूनियर की विरासत को बढ़ावा देता है। यह बिल अमी बेरा द्वारा सह-प्रायोजित है। इस विधेयक में अमेरिका और भारत के बीच द्विपक्षीय साझेदारी स्थापित करने का प्रयास किया गया है। यह दोनों देशों के बीच संबंधों को भी मजबूत करेगा।

विधेयक के मुख्य निष्कर्ष

यह विधेयक भारत सरकार और अमेरिकी सरकार को दोनों देशों के छात्रों के लिए एक वार्षिक शैक्षिक मंच की स्थापना करने का अधिकार देता है, जो दोनों प्रतिष्ठित हस्तियों के काम और विरासत का अध्ययन करेगा। यह विधेयक गांधी की अहिंसा के सिद्धांतों पर स्थापित संघर्ष समाधान पर एक विकास प्रशिक्षण प्रणाली स्थापित करने और भारत में सामाजिक, पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए एक आधार स्थापित करने का भी प्रयास करेगा। बिल में यूएस-इंडिया गांधी-किंग डेवलपमेंट फाउंडेशन की स्थापना की गई है। इस बिल में यूनाइटेड स्टेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ पीस के अध्यक्ष और सीईओ से गांधी-किंग ग्लोबल अकैडमी के रूप में एक प्रशिक्षण पहल विकसित करने के लिए भी व्यवस्था है।

जॉन लुईस

वे एक अमेरिकी राजनेता और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता थे,  वे केवल अमेरिका ही नही बल्कि दुनिया भर में लोकतंत्र, मानवाधिकार, न्याय और समानता के लिए लड़े। वह महात्मा गांधी और मार्टिन लूथर किंग जूनियर के काम से बहुत प्रेरित थे। कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत की यात्रा पर, उन्होंने महात्मा गांधी और मार्टिन लूथर किंग जूनियर के दर्शन को लागू करने के लिए गांधी-किंग एक्सचेंज अधिनियम बनाया था।

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