गोबर-धन योजना कचरे से धन कमाने और ऊर्जा को बढ़ावा देने हेतु शुरू की गई

पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय ने गोबर (गैल्वेनाइजिंग कार्बनिक जैव-कृषि संसाधन) – तथा राष्ट्रीय डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनडीआरआई) करनाल में धन ( DHAN) योजना शुरू की है। इसे पेयजल और स्वच्छता मंत्री उमा भारती द्वारा स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत शुरू किया गया है ।

पृष्ठभूमि

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में स्वच्छ गांव बनाने के लिए दो मुख्य घटक शामिल हैं। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में खुले में शौचालय मुक्त (ओडीएफ) गांव बनाये जा रहे हैं और गांवों में ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन हो रहा हैं। पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय अब ओडीएफ-प्लस गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिसमें 3.5 लाख गांवों के ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ाने के उपायों सहित देश के 374 जिलों और 16 राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों को ओडीएफ घोषित किया गया था।

योजना का महत्व

यह देश के लिए बेहद फायदेमंद होगा क्योंकि भारत दुनिया में सबसे ज्यादा मवेशी आबादी वाला देश है जो लगभग 3 मिलियन टन गोबर पैदा करता है। यह किसानों को गोबर को अन्य अपशिष्ट कचरे के रूप में नहीं बल्कि आय के स्रोत के रूप में विचार करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

यह गांवों को स्वच्छ , पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार और खेती की पैदावार में वृद्धि करके लोगों को कई लाभ प्रदान करेगा। इसके तहत, बायोगैस से खाना पकाने और विद्युत् हेतु उपयोग की जाने वाली ऊर्जा में आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद करेगी।

यह किसानों की आय में वृद्धि करेगा। यह अपशिष्ट संग्रह, परिवहन, बायोगैस बिक्री आदि से जुड़ी नौकरियों के लिए नए अवसर पैदा करेगा।

यह तेल कंपनियों के लिए बाजार में स्थिर ईंधन आपूर्ति ,सरकारी योजनाओं और उद्यमियों के लिए बैंकों के माध्यम से बाजार में सुलभ क्रेडिट भी प्रदान करेगा।

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