चीन ने शस्त्र व्यापार संधि (ATT) में शामिल होने का फैसला लिया

चीन ने बहुपक्षीय शस्त्र व्यापार संधि (ATT) में शामिल होने का निर्णय लिया है। 2013 में चीन 23 देशों में से एक था, जब उसने संयुक्त राष्ट्र में संधि को अपनाने के लिए वोट करने से परहेज़ किया था।

मुख्य बिंदु

चीन अब एक जिम्मेदार देश के रूप में विश्व मंच पर स्वयं को प्रदर्शित करने का प्रयास कर रहा है।  जबकि हाल ही में चीन ने  हांगकांग की स्वायत्तता पर अंकुश लगाने का प्रयास क्यिया, दक्षिण चीन सागर में पूर्ण संप्रभुता का प्रशासन करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है, और आगे भारत के साथ सीमा संघर्ष बढ़ा रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अप्रैल 2019 में घोषणा की थी कि अमेरिका अपने प्रशासन के तहत कभी भी शस्त्र व्यापार संधि की पुष्टि नहीं करेगा (अमेरिका ने संधि पर हस्ताक्षर किए हैं लेकिन अभी तक पुष्टि नहीं की है)।

मार्च 2020 में स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2015 से 2019 के बीच चीन वैश्विक बाजार के 53 देशों को हथियार निर्यात करने वाला दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा हथियार-निर्यातक था।

शस्त्र व्यापार संधि (Arms Trade Treaty)

इस संधि के तहत, वैश्विक मानकों के अनुसार पारंपरिक हथियारों की अंतरराष्ट्रीय बिक्री और हस्तांतरण को विनियमित किया जाता है।

इस संधि  को संयुक्त राष्ट्र महासभा में 2 अप्रैल, 2013 को अपनाया था, 24 दिसंबर, 2014 से यह संधि लागू हो गयी।  यह संधि अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य देशों के बीच पारदर्शिता और सहयोग को बढ़ावा देना है। आज तक लगभग 130 देशों ने इस संधि की पुष्टि की है। भारत ने अभी इस संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

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