जस्टिस पिनाकी चन्द्र घोष ने लोकपाल का आदर्श वाक्य तथा लोगो लांच किया

हाल ही में लोकपाल के चेयरपर्सन जस्टिस पिनाकी चन्द्र घोष ने लोकपाल का लोगो लांच किया। इसके लिए MyGov प्लेटफार्म पर खुली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। चयन पक्रिया में प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) के प्रशांत मिश्रा द्वारा डिजाईन किया गया लोगों चुना गया। इसके अलावा लोकपाल का आदर्श वाक्य “मा गृधः कस्यस्विद्धनम्” चुना गया, इसका अर्थ है “किसी के धन का लोभ मत करो”।

लोकपाल

जस्टिस पिनाकी चन्द्र घोष भारत के प्रथम लोकपाल हैं। लोकपाल में एक चेयरमैन तथा 8 सदस्यों का प्रावधान है। नियमों के अनुसार लोकपाल के आठ सदस्यों में से चार सदस्य न्यायिक होने चाहिए।

लोकपाल के चार न्यायिक सदस्य विभिन्न उच्च न्यायालयों के पूर्व मुख्य न्यायधीश हैं – जस्टिस दिलीप बी. भोसले, प्रदीप कुमार मोहंती, अभिलाषा कुमारी तथा अजय कुमार त्रिपाठी।

लोकपाल के चार गैर-न्यायिक सदस्य इस प्रकार हैं : अर्चना रामासुन्दरम (सशस्त्र सीमा बल की पहली महिला प्रमुख), दिनेश कुमार जैन (महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव), महेंद्र कुमार (पूर्व IRS अफसर) तथा इन्द्रजीत प्रसाद गौतम (गुजरात कैडर के पूर्व आईएएस अफसर) ।

लोकपाल का अध्यक्ष बनने के लिए उम्मीदवार सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायधीश, सर्वोच्च न्यायालय का न्यायधीश अथवा भ्रष्टाचार विरोधी नीति, लोक प्रशासन, वित्त, विधि अथवा प्रबंधन के क्षेत्र से कम से कम 25 वर्षों से जुड़ा हुआ व्यक्ति होना चाहिए। लोकपाल का न्यायिक सदस्य बनने के लिए उम्मीदवार सर्वोच्च न्यायालय का न्यायधीश अथवा उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायधीश होना चाहिए। लोक पाल के अन्य सदस्य कम से कम 25 वर्षों से भ्रष्टाचार विरोधी नीति, लोक प्रशासन, वित्त, विधि अथवा प्रबंधन के क्षेत्र से जुड़े हुए होने चाहिए।

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