टीबी मुक्त भारत अभियान की शुरूआत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 2025 तक भारत से टीबी को खत्म करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है , नई दिल्ली में टीबी मुक्त भारत अभियान की शुरूआत की गई साथ ही सभी राज्यों से मुहिम से जुड़ने की अपील की गई ।

-भारत से टीबी उन्मूलन की प्रतिबद्धता और रणनीति को दुनिया के सामने रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत ने 2025 तक इस बीमारी से मुक्त हो जाने का लक्ष्य रखा है। जबकि संयुक्त राष्ट्र ने पूरी दुनिया से टीबी से मुक्ति का लक्ष्य सन् 2030 रखा है। इस मौक़े प्रधानमंत्री ने टीबी मुक्त भारत अभियान की नयी राष्ट्रीय रणनीति योजना का लॉन्च किया।

-अगले तीन वर्षों के लिए 12 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रत्येक मरीज को गुणवत्ता वाली जांच, इलाज, और समर्थन मिल सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीबी से लड़ने में भारत के प्रयासों और सभी का एक साथ मिलकर टीबी के ख़िलाफ़ काम करने को सराहा। उन्होने भारत के संघात्मक ढांचे को सम्मेलन में रखते हुए ख़ुशी जताई कि देश के सभी राज्य इस बीमारी से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसी भी अपेक्षित लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपने काम करने के तरीक़े को समय-समय पर बदलना चाहिए। उन्होने कहा कि भारत में अब टीकाकरण पिछले तीन सालों में तेज़ी से बढ़ा है।

-सम्मेलन का आयोजन स्वास्थ्य मंत्रालय, विश्व स्वास्थ्य संगठन का दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र कार्यालय और तपेदिक रोको नामक संगठन ने संयुक्त रूप से किया। सम्मेलन में एशिया अफ्रीका देशों के बीस देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों ने शिरकत की। साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक और देश के सभी राज्यों के स्वास्थ्य मंत्री ने भी शिरकत की।सम्मेलन के दौरान इस महामारी से बचने के लिए लोगों ने अपनी अहम राय रखी। इस मौक़े पर भारत के स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने कहा कि भारत इससे मुक्त होने के लिए प्रतिबद्ध है और इसी वज़ह से बजट में भी टीबी से पीडित मरीज़ों के लिए अलग से प्रावधान रखा गया है।

– टीबी के खिलाफ जंग के लिए नए प्लान के तहत मरीज़ों की पहचान कर उन तक दवा से लेकर अन्य ज़रूरी चीज़े पहुंचाना है। सभी को इलाज मिले ये भी सुनिश्चित किया गया है। इसके बढ़ते दायरे को रोकने के लिए जागरूकता फैलाने से लेकर टीबी उन्मूलन से जुड़ी सभी इकाईयों को मज़बूत किया जाएगा।संक्रामक बीमारियों से होने वाली मौत की बात करें तो देश में टीबी से सबसे ज्यादा मौत होती है। 2016 में अठ्ठाईस लाख टीबी के मरीज थे जिसनें चार लाख मरीज की मौत हो गई थी।

टीबी रोग

टीबी रोग को तपेदिक, क्षय जैसे कई नामों से जाना जाता है। तपेदिक संक्रामक रोग होता है जो माइकोबैक्टिरीअम टूबर्क्यूलोसस (mycobacterium tuberculosis) नामक जीवाणु के कारण होता है। मूल लक्षणों में खाँसी का तीन हफ़्तों से ज़्यादा रहना, थूक का रंग बदल जाना या उसमें रक्त की आभा नजर आना, बुखार, थकान, सीने में दर्द, भूख कम लगना, साँस लेते वक्त या खाँसते वक्त दर्द का अनुभव होना आदि। इस बीमारी से टीकाकरण या साफ सफाई रखने से बचा जा सकता है। यक्षमा के रोगी का इलाज संभव है लेकिन इसका इलाज पूरी तरह से करना चाहिए, आधा करके नहीं छोड़ना चाहिए, वरना ये रोग जानलेवा भी हो सकता है।

तपेदिक रोग होने के कारण

तपेदिक या टीबी कोई आनुवांशिक रोग नहीं है। यह किसी को भी हो सकता है। जब कोई स्वस्थ व्यक्ति तपेदिक रोगी के पास जाता है और उसके खाँसने, छींकने से जो जीवाणु हवा में फैल जाते हैं उसको स्वस्थ व्यक्ति साँस के द्वारा ग्रहण कर लेता है। इसके अलावा जो लोग अत्यधिक मात्रा में ध्रूमपान या शराब का सेवन करते हैं, उनमें इस रोग के होने की संभावना ज़्यादा होती है। इस रोग से बचने के लिए साफ-सफाई रखना और हाइजिन का ख्याल रखना बहुत ज़रूरी होता है।

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