ट्रेन 18 आधिकारिक रूप से भारत की सबसे तेज़ ट्रेन बनी

ट्रेन 18 हाल ही में आधिकारिक रूप से भारत की सबसे तेज़ ट्रेन बनी, इसकी घोषणा केन्द्रीय रेल मंत्री पियूष गोयल ने की। भारत की पहली इंजन-लेस ट्रेन ने 2 दिसम्बर को किये गये ट्रायल के दौरान 180 किमी/घंटा की गति प्राप्त की। यह परीक्षण कोटा-सवाई माधोपुर सेक्शन में किया गया। यह ट्रेन संभवतः जनवरी, 2019 में वाणिज्यिक कार्य शुरू कर सकती है।

इससे पहले ट्रेन 18 का परीक्षण 29 अक्टूबर को किया गया, ट्रेन 18 भारत की पहली बिना इंजन की ट्रेन है। इसका निर्माण चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में किया गया है। इस रेल के निर्माण में 100 करोड़ रुपये की लागत आई है। यह रेल 30 वर्ष पुरानी शताब्दी एक्सप्रेस का स्थान लेगी। इस रेल के 80% कल-पुर्ज़े भारत में निर्मित किये गये हैं, यह ट्रेन 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से दौड़ सकती है। 2019-20 तक इस प्रकार की 5 अन्य रेलों का निर्माण किया जायेगा।

मुख्य बिंदु

16 कोच वाले इस प्रोटोटाइप में लोकोमोटिव (इंजन) नहीं है, यह शताब्दी रेल की तुलना में 15% कम समय लेगी। ट्रेन 18 में सेल्फ-प्रोपल्शन मोड्युल का उपयोग किया गया है, यह ट्रेन 160 किलोमीटर की गति से यात्रा करने की क्षमता रखती है। इस ट्रेन में तीव्र गति के लिए नई तकनीकों का उपयोग किया गया है। इसके अतिरिक्त इस ट्रेन में आटोमेटिक द्वार तथा जीपीएस बेस्ड यात्री सूचना प्रणाली इत्यादि का उपयोग भी किया गया है।
इस रेलगाड़ी का 3-4 दिन तक परीक्षण किया जायेगा। परीक्षण के सफल होने के बाद इस प्रोटोटाइप को रिसर्च डिजाईन एंड स्टैंडर्ड्स आर्गेनाईजेशन (RDSO) को सौंपा जायेगा। शताब्दी ट्रेन को 1988 में शुरू किया गया था, फिलहाल यह 20 मार्गों पर कार्यरत्त है, यह मेट्रो शहरों को अन्य महत्वपूर्ण शहरों से जोड़ती है।

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