डेयरी सेक्टर के लिए नई योजना: भारत सरकार ने कार्यशील पूंजी पर ब्याज दरों में छूट दी

14 मई, 2020 को भारत सरकार ने डेयरी क्षेत्र के लिए एक नई योजना शुरू की। इस योजना ने डेयरी सहकारी समितियों और एफपीओ (किसान निर्माता संगठन) का समर्थन करने के लिए कार्यशील पूंजी पर ब्याज सबवेंशन की शुरुआत की है।

मुख्य बिंदु

इस योजना का उद्देश्य मौजूदा दूध प्रसंस्करण इकाइयों को आधुनिक बनाना है। इसके द्वारा देश की दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता को बढ़ाकर प्रति दिन 126 लाख लीटर किया जाएगा।

यह योजना बैंकों द्वारा सहकारी समितियों और किसान स्वामित्व वाले दुग्ध  संगठनों और कंपनियों को दिए गए ऋणों पर ब्याज सब्सिडी प्रदान करेगी। इस योजना में उन ऋणों को शामिल किया जाएगा जिन्हें 1 अप्रैल, 2020 और 31 मार्च, 2021 के बीच स्वीकृत किया जायेगा।

इस योजना में 2% प्रति वर्ष का ब्याज उपदान भी दिया गया है। यदि किसान समय पर ऋण चुकाते हैं, तो ब्याज उ उपदान का 2% अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा।  संशोधित योजना से किसानों के हाथों में 100 करोड़ रुपये उपलब्ध होने की उम्मीद है। इस योजना को राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) द्वारा लागू किया जाना है।

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB)

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की स्थापना भारत की संसद के एक अधिनियम के माध्यम से की गई थी। यह 1965 में स्थापित किया गया था। इस बोर्ड का मुख्य उद्देश्य ‘अमूल कोआपरेटिव’ के समान अन्य सफल कोआपरेटिव की स्थापना करना था। विश्व बैंक ने इस मिशन की सहायता की। इसे “ऑपरेशन फ्लड” नाम दिया गया था और 26 साल तक चला।

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