तालिबान और अफगान सरकार एक बैठक आयोजित करेंगे

वैश्विक अराजकता के बीच यह इतिहास में पहली बार है कि अफगान सरकार और तालिबान जो अफगान सरकार को मान्यता नहीं देता, एक बैठक करेंगे और देश के भविष्य पर चर्चा करेंगे।

पृष्ठभूमि

छह तालिबान कैदियों के अंतिम जत्थे की रिहाई के तुरंत बाद यह बात सामने आई कि दोनों पार्टी ने घोषणा की कि वे 12 सितंबर को दोहा में अफगान वार्ता शुरू करेंगे। अमेरिका-तालिबान समझौते के बाद दूसरे चरण के रूप में यह वार्ता की जा रही है। इस आतंकी समूह ने अफगान उपराष्ट्रपति अमरतुल्लाह सालेह पर भी हत्या का प्रयास किया था। उनके काफिले को निशाना बनाया गया और इस हमले में दस निर्दोष लोगों को मार डाला गया।

वार्ता से क्या उम्मीद की जा सकती?

एक स्थायी युद्ध विराम इस अंतर-अफगान वार्ता का एक प्रमुख एजेंडा होगा। समूह स्थायी युद्ध विराम की तारीख और प्रस्तावों पर चर्चा कर सकता है। हालांकि, समझौता होने की अधिक सम्भावना नही है। मांगों को बढ़ाने और क्षेत्र पर नियंत्रण रखने के लिए तालिबान ने पहले ही हिंसा के स्तर को बढ़ा दिया है।

तालिबान का दृष्टिकोण

तालिबान इस वार्ता से क्या चाहता है, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है। अतीत में, उन्होंने लोकतंत्र की आलोचना की और बताया कि यह एक पश्चिमी निर्माण है जिसके लिए अफगानिस्तान में कोई जगह नहीं है।

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