धनुष तोप अपने अंतिम परीक्षण में सफल

भारत की पहली स्वदेशी, लंबी दूरी की तोप धनुष ने पोखरण, राजस्थान में अपना अंतिम परीक्षण सफलतापूर्वक पारित कर दिया है. इससे भारतीय सेना में शामिल होने के लिए तोप का मार्ग भी प्रशस्त हो गया. इससे पहले तोप का तीव्र ठंड की स्थिति में सिक्किम और लेह में और भीषण आर्द्र और गर्मी के मौसम में बालासोर, ओडिशा, बबीना और पोखरण में परीक्षण किया गया था. बोफोर्स तोपों के बाद से भारतीय सेना ने अब तक कोई नई तोपें प्रारम्भ नहीं की हैं. पहले चरण में 114 धनुष तोपों के निर्माण का आदेश दिया गया है और इसके बाद 400 और तोपों का ऑर्डर देने की उम्मीद है.

स्वदेशी धनुष तोप

धनुष 155 मिमी x 45 मिमी की एक आर्टिलरी गन (तोप) है. इसे भारतीय सेना की आवश्यकताओं के आधार पर ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड (OFB), कोलकाता द्वारा विकसित किया गया है और जबलपुर स्थित गन कैरिज फैक्ट्री (GCF) द्वारा निर्मित किया गया है. यह स्वीडिश 155-मिमी बोफोर्स हेविट्जर का उन्न्त संस्करण है, जिसे भारत ने 1980 के दशक के मध्य में प्राप्त किया था, इसीलिए इसे ‘देसी बोफोर्स’ भी कहा जाता है. यह सटीकता और परिशुद्धता के साथ 40 किलोमीटर (आयातित बोफोर्स बंदूकों की तुलना में 11 किमी अधिक) की प्रहार सीमा रखती है. इसके 81% घटक स्वदेशी रूप से निर्मित हैं जिसे 2019 तक बढ़ाकर 90% तक किया जाएगा. प्रत्येक तोप की लागत 14.50 करोड़ रुपये जबकि प्रत्येक खोल में 1 लाख रुपये का खर्चा आया है. गोला बारूद के प्रकार के आधार पर यह अधिक अग्नि शक्ति उत्पन्न करती है. इसमें कई महत्वपूर्ण अग्रिम सुविधाएं हैं, जिनमें ऑल-इलेक्ट्रिक ड्राइव, उच्च गतिशीलता, शीघ्र तैनाती, सहायक पावर मोड, उन्नत संचार प्रणाली, स्वचालित कमांड और नियंत्रण प्रणाली शामिल है.

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