भारतीय मानक ब्यूरो ने अखिल भारतीय स्तर पर तरल क्लोरीन हेतु पहला लाइसेंस प्रदान किया

भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने भारतीय मानक (आईएस) 646: 1986 के अनुसार अखिल भारतीय स्तर पर तरल क्लोरीन के लिए गुजरात अल्कलीज एंड केमिकल्स लिमिटेड को पहला लाइसेंस दिया है। यह अखिल भारतीय स्तर पर दिया गया पहला लाइसेंस है। लाइसेंस को अप्रैल 2018 से एक वर्ष की अवधि के लिए प्रभावी बनाया गया है।
तरल क्लोरीन को धातु के कंटेनर में संग्रहीत किया जाता है। यह आमतौर पर धातु कंटेनर से तरल वाष्पीकरण द्वारा प्राप्त गैस के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से कागज, लुगदी, पानी नसबंदी, कपड़ा ब्लीचिंग और रसायनों के निर्माण में किया जाता है।

भारतीय मानक ब्यूरो

1 अप्रैल, 1987 को संसदीय अधिनियम, 1987 द्वारा भारतीय मानक ब्यूरो अस्तित्व में आया। नई दिल्ली में इसका मुख्यालय है। वस्तुओं के मानकीकरण, चिन्हितकरण और उन्हें गुणवत्ता प्रमाणपत्र देना और इन कार्यों से संबद्ध तथा अनुषंगी मामलों से संबंधित गतिविधियों का सामंजस्यपूर्ण विकास करना इसका मुख्य उद्देश्य है। यह धातुकर्म इंजीनियरिंग, पेट्रोल और कोयला सम्बंधित वस्तुएं, रसायन, खाद्य एवं कृषि, सिविल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, प्रबंधन और प्रणाली,चिकित्सा उपकरण एवं अस्पताल, कपडा, परिवहन इंजीनियरिंग उत्पादन और सामान्य इंजीनियरिंग तथा जल संसाधन जैसे चौदह विभागों के अंतर्गत मानक निर्माण संबंधी कार्य करता है। वर्त्तमान में 14 विभागीय परिषद् इन विभागों के अनुसार काम कर रही है।

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