भारतीय विधि आयोग ने बीसीसीआई को सार्वजनिक निकाय बनाने और आरटीआई के तहत लाने की सिफारिश की

भारतीय विधि आयोग (एलसीआई) ने भारतीय क्रिकेट नियामक मंडल (बीसीसीआई) को सार्वजनिक निकाय के रूप में घोषित करने की सिफारिश की है। बीसीसीआई और उसके सभी सदस्य क्रिकेट संघों को सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत लाये जाने की भी सिफारिश की गयी है ।

भारतीय विधि आयोग की सिफारिशें

बीसीसीआई की एकाधिकारवादी गतिविधियां, प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से, नागरिकों, खिलाड़ियों और अन्य कार्यकर्ताओं के मौलिक अधिकारों को प्रभावित करती हैं। नागरिकों को अपने मौलिक अधिकारों के किसी भी उल्लंघन के लिए बीसीसीआई के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में जाने में सक्षम होना चाहिए।

हितधारकों के बुनियादी मानवाधिकारों के किसी भी उल्लंघन के लिए बीसीसीआई को सभी परिस्थितियों में जवाबदेह होना चाहिए। क्रिकेट के नियमों में बीसीसीआई ‘राज्य जैसी’ शक्तियों का प्रयोग करती है, और इस प्रकार, संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत ‘राज्य’ की परिभाषा के तहत आता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए राज्य द्वारा बीसीसीआई को एक इकाई के रूप में कैसे अनुमति दी जा सकती है। बीसीसीआई राष्ट्रीय खेल संघ (एनएसएफ) और खेल मंत्रालय की वेबसाइट के रूप में अप्रत्यक्ष रूप से कार्य करता है, राष्ट्रीय खेल संघ की सूची में स्पष्ट रूप से बीसीसीआई का उल्लेख करना चाहिए। यह इसे आरटीआई अधिनियम के दायरे में लाएगा।

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