भारत ने उत्तर कोरिया को 1 मिलियन डालर की सहायता दी

भारत सरकार ने हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुरोध पर 1 मिलियन अमरीकी डालर की चिकित्सा सहायता उत्तर कोरिया को दी। डब्ल्यूएचओ के एंटी-ट्यूबरकुलोसिस प्रोग्राम के हिस्से के रूप में यह चिकित्सा सहायता प्रदान की गयी है।

मुख्य बिंदु

उल्लेखनीय है कि उत्तर कोरिया संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों के अधीन है। हालाँकि, भारत की चिकित्सा सहायता डब्ल्यूएचओ के एंटी-ट्यूबरकुलोसिस प्रोग्राम के तत्वावधान में है और इसलिए इसे प्रतिबंधों से छूट दी गई है।

उत्तर कोरिया के खिलाफ प्रतिबंध

कई देशों ने उत्तर कोरिया के खिलाफ प्रतिबंध लगाए हैं। इसमें ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, रूस, दक्षिण कोरिया, ताइवान और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। उत्तर कोरिया के खिलाफ पहले प्रतिबन्ध को 2006 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा मंज़ूरी दी गई थी। उत्तर कोरिया पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रतिबंध समिति की स्थापना की गई थी।

भारत में तपेदिक (टीबी)

भारत 2025 तक देश से क्षय रोग (टीबी) को खत्म करने के लक्ष्य के लिए प्रतिबद्ध है। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित समय सीमा से आगे है।

WHO का लक्ष्य है कि 2030 तक टीबी को पूरी तरह से दुनिया से समाप्त किया जाए।

 

भारत ने लक्ष्य पर काम करने के लिए राष्ट्रीय क्षय रोग कार्यक्रम शुरू किया है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी वार्षिक तपेदिक रिपोर्ट, 2020 के अनुसार, त्रिपुरा और नागालैंड कार्यक्रम के तहत सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्य हैं।

भारत में टीबी के लिए पहल

निक्षय इकोसिस्टम : यह राष्ट्रीय टीबी सूचना प्रणाली है

निक्षय पोषण योजना: इसका उद्देश्य टीबी रोगियों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है

सक्षम प्रोजेक्ट: यह टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) की एक परियोजना है जो देश में टीबी रोगियों को मनो-सामाजिक परामर्श प्रदान करती है।

टीबी हारेगा देश जीतेगा: यह एक अभियान है जिसे 2019 में शुरू किया गया था

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