भारत में सैन्य विमान में मिश्रित जेट जैव इंधन का पहली बार उपयोग किया गया

17 दिसम्बर को भारतीय वायुसेना के ए.एन. 32 विमान में मिश्रित जेट जैव इन्धन का उपयोग किया गया, यह एक परीक्षण उड़ान थी। यह परीक्षण उड़ान कर्नाटक के बंगलुरु में भारतीय वायुसेना के परीक्षण स्थल से भरी गयी थी। इस परीक्षण के लिए रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन, विमानिकी गुणवत्ता महानिदेशालय तथा CSIR-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान ने मिलकर कार्य किया था।

मुख्य बिंदु

27 जुलाई, 2018 को भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल बी. एस. धनोआ ने जैव इन्धन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही थी। भारतीय वायुसेना ने 2019 गणतंत्र दिवस समारोह में फ्लाईपास्ट के लिए ए.एन. विमान में मिश्रित जैव इंधन के उपयोग करने की योजना बनायी है। इसके लिए विमान में 10% मिश्रित जैव इंधन का उपयोग किया जा सकता है।

भारत में उड़ान के लिए जैव इन्धन का उपयोग

जैव इंधन द्वारा चालित भारत की पहली उड़ान में रतनजोत बीज तेल का उपयोग किया गया था, यह उड़ान देहरादून से दिल्ली तक अगस्त, 2018 में भरी गयी थी। इस इंधन में रतनजोत बीज के तेल को हवाई टरबाइन इंधन से मिलाया गया था। 43 मिनट की यह उड़ान स्पाइसजेट के बोम्बार्डीयर Q-400 विमान द्वारा भरी गयी थी। इस उड़ान के दौरान विमान में 20 अधिकारी तथा 5 क्रू मेम्बर्स सवार थे।

इस उड़ान के दौरान विमान के एक इंजन में 25% जैव इंधन (रतनजोत बीज से प्राप्त) तथा 75% हवाई टरबाइन इंधन का मिश्रण था, जबकि विमान के दुसरे इंजन में केवल हवाई टरबाइन इंधन ही था। इस टेस्ट फ्लाइट का उद्देश्य वायुयान में जैव इंधन के उपयोग की तकनीकी सम्भावना को सुनिश्चित था। अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अनुसार हवाई टरबाइन इंधन के साथ 50% तक जैव इंधन का मिश्रण किया जा सकते हैं। इस मिश्रण से लागत में 15-20% की कमी आ सकती है।

रतनजोत

रतनजोत एक शुष्क रोधी पौधा है जो कम उपजाऊ भूमि में उगता है। इसका विकास काफी तीव्र गति से होता है और यह 50 वर्ष तक बीज उत्पन्न करता है। यह देश के कई भागों में पाया जाता है। यह पौधा बहुत कम पोषक तत्वों की सहायता से भी जीवित रह सकता है।

रतनजोत के बीज में 37% तेल होता है। यह बिना धुंए की ज्वाला उत्पन्न करता है। यह वातावरण को अधिक नुकसान नहीं पहुंचाता। इसका उपयोग आरम्भ में डीजल इंजन में इंधन के रूप में किया गया था। रतनजोत का उपयोग कीटनाशक के रूप में भी किया जाता है। इसके अतिरिक्त रतनजोत का उपयोग औषधि के रूप में भी किया जाता है।

रतनजोत से प्राप्त जैव इंधन

इसका उत्पादन वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसन्धान परिषद् ने देहरादून में स्थित प्रयोगशाला में भारतीय पेट्रोलियम संस्थान के साथ मिलकर किया गया था। जैव इंधन के रूप में उपयोग के लिए रतनजोत बीज पर वर्ष 2000 में प्रयोग शुरू हुए थे, व्यावहारिक तौर पर जैव इंधन का निर्माण करने के लिए लगभग 8 वर्ष का समय लगा।

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