रक्सौल और काठमांडू के बीच सामरिक रेलवे नेटवर्क बनाने हेतु सहमति

भारत और नेपाल के बीच अपने रणनीतिक संबंधों को मजबूती देने के लिए रेल नेटवर्क स्थापित करने पर सहमति बनी है। इस रेल नेटवर्क के जरिए भारत का इरादा नेपाल में चीन के लगातार बढ़ते दखल की भी काट करना है। नेपाल के पीएम केपी ओली और भारत के पीएम नरेंद्र मोदी के बीच हुई बातचीत के बाद इन फैसलों का ऐलान किया गया। थोक में माल की आवाजाही के लिए भारत बिहार के रक्सौल से नेपाल की राजधानी काठमांडू के बीच रणनीतिक रेल संपर्क का निर्माण करेगा। नई विद्युतीकृत रेल लाइन बनाने पर सहमति बनी है।

मुख्य तथ्य

० भारत के सीमांत शहर से नेपाल को जोड़ने वाली इस रेल लाइन का खर्च भारत वहन करेगा।
० इसका उद्देश्य दोनों पड़ोसी देशों के बीच संपर्क का विस्तार करना, लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देना और आर्थिक वृद्धि एवं विकास को तेज करना है। ।
० इस साल के अंत तक जयनगर से जनकपुर/कुर्था तथा जोगबनी से विराटनगर कस्टम यार्ड के बीच रेल लाइन 2018 में तैयार हो जाएगी। जयनगर – विजलपुरा-वर्दीवास और जोगबनी-विराटनगर परियोजनाओं के शेष हिस्से पर काम आगे बढ़ाया जाएगा।

यह रेल लाइन चीन के फैसले की काट करेगी

रक्सौल से काठमांडू को जोड़ने वाली रणनीतिक रेल लाइन इस संबंध में भी अहम है क्योंकि पहले चीन द्वारा तिब्बत से होकर नेपाल तक रेल रूट विकसित करने का ऐलान किया जा चुका है। हाल ही में चीन ने नेपाल को जोड़ने वाले तीन राजमार्गों पर भी काम शुरू किया है, जो 2020 तक पूरे हो जाएंगे। इसके अलावा न्यू जलपाईगुड़ी -काकरभिट्टा, नौतनवां- भैरहवा और नेपालगंज रोड-नेपालगंज रेल परियोजनाओं पर भी विचार चल रहा है।

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