रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने फिएट डिजिटल मुद्रा को पेश करने के लिए अंतर-विभागीय समूह का गठन किया

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने अंतर-विभागीय समूह का गठन किया है जो इसके द्वारा समर्थित फिएट डिजिटल मुद्रा को पेश करने के लिए इसकी व्यवहारिकता पर अध्ययन और मार्गदर्शन प्रदान करेगा । इसे जून 2018 के अंत तक प्रस्तुत किया जाएगा | फिएट मुद्रा वह मुद्रा है जिसे सरकार ने कानूनी रूप से घोषित किया है। यह क्रिप्टोकुरेंसी या आभासी मुद्रा से अलग है, जैसे कि बिटकॉइन जो कानूनी रूप से मान्य नहीं है और सरकार द्वारा समर्थित नहीं है।

फिएट डिजिटल मुद्रा

फिएट डिजिटल मुद्रा क्रिप्टो-करेंसी क्रिप्टोग्राफी प्रोग्राम पर आधारित एक वर्चुअल करेंसी या ऑनलाइन मुद्रा है। यह एक पीयर-टू-पीयर कैश सिस्टम है।
इसको केवल डिजिटल वालेट में ही रखा जा सकता है। क्रिप्टो-करेंसी के इस्तेमाल के लिये बैंक या किसी अन्य वित्तीय संस्थान की ज़रूरत नहीं होती।

फिएट और नॉन-फिएट क्रिप्टो-करेंसी

० भारतीय रिज़र्व बैंक के साथ-साथ सरकारें भी “नॉन-फिएट” क्रिप्टो-करेंसी को लेकर समय-समय पर एडवाइजरी ज़ारी करती रहती हैं।
० ‘नॉन-फिएट’ क्रिप्टो-करेंसी जैसे कि बिटकॉइन, एक निजी क्रिप्टो-करेंसी है। जबकि ‘फिएट क्रिप्टो-करेंसी’ एक डिजिटल मुद्रा है जो देश के केद्रीय बैंक द्वारा जारी किया जाता है।
० “नॉन-फिएट” क्रिप्टो-करेंसी को लेकर तमाम तरह की आशंकाएँ व्यक्त की जा रही हैं और यह तकनीकी उन्नयन विनाशकारी साबित हो सकता है।
० भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा यदि कोई आभासी मुद्रा जारी की जाती है, तो उसे फ़िएट क्रिप्टो-करेंसी कहा जाएगा।
० बिटकॉइन (bitcoin), एथ्रॉम (ethereum) और रिप्पल (ripple) कुछ लोकप्रिय क्रिप्टो-करेंसी हैं।

क्रिप्टो-करेंसी की आगे की सफलता इसके विनियामक ढाँचे पर निर्भर करता है। विभिन्न देशों ने इस नवाचार के प्रति अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाया है। कुछ दिनों पहले वेनेजुएला ने पेट्रो नामक क्रिप्टो-करेंसी का प्रचालन आरंभ किया था, लेकिन वहाँ की संसद ने पेट्रो को अवैध घोषित कर दिया है।यही कारण है कि इस संबंध में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। अतः सरकार को आतंक के वित्तपोषण, मनी लॉन्ड्रिंग और कर चोरी में क्रिप्टो-करेंसी के संभावित प्रयोग को ध्यान में रखते हुए नीतियाँ बनानी होंगी।

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