लद्दाख की दर्द आर्यन जनजाति

दर्द आर्यन जनजाति जम्मू-कश्मीर के लद्दाखक्षेत्र से सम्बंधित है। इस जनजाति को इसकी उत्कृष्ट परम्पराओं व वस्त्रों के लिए जाना जाता है। वर्तमान यह जनजाति अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संजोये रखने के लिए संघर्ष कर रही है।

मुख्य बिंदु

हाल ही में दर्द आर्यन फेस्टिवल 2019 के दौरान, इसके प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की। दर्द आर्यन जनजाति को आर्यों का वंशज माना जाता है। मौजूदा समय में तीव्र आधुनिकीकरण, प्रवास तथा धर्मान्तरण के कारण यह जनजाति काफी संघर्ष कर रही है। यह जनजाति मुख्य रूप से लेह तथा कारगिल जिले के धा, हनु, बीमा, दार्चिक तथा गरकोन गावों में निवास करती है। इन गावों को सामूहिक रूप से आर्य घाटी कहा जाता है। इस जनजाति की शारीरिक विशेषताएं, सामाजिक जीवन, संस्कृति तथा भाषा काफी अलग है। शोधकर्ताओं का मानना है कि लद्दाख के आर्य अथवा ब्रोक्पा सिकंदर की सेना में शामिल थे। वे इस क्षेत्र में लगभग 2000 वर्ष पूर्व आये थे। इस जनजाति की जनसँख्या लगभग 4,000 है।

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