विदेशी कानून फर्म भारत में अभ्यास नहीं कर सकते, लेकिन उनके वकील सलाह दे सकते हैं: SC

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए कहा कि विदेशी लॉ फर्मों को भारत में ऑफिस खोलने और अदालतों में प्रैक्टिस करने की इजाजत नहीं है, लेकिन वे यहां अपने क्लाइंट को विदेशी कानून के बारे में सलाह देने के लिए अस्थायी तौर पर आ सकते हैं। उन्हें अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन के मामलों में भी यहां आने की अनुमति होगी।
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस यूयू ललित की खंडपीठ ने विदेशी लॉ फर्मों के मामले में सुनवाई करते हुए उनकी गतिविधियों को संचालित करने को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) को नियम बनाने का निर्देश दिया।

पीठ ने इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट के 21 फरवरी 2012 के फैसले को कुछ बदलावों के साथ बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने एके बालाजी बनाम बीसीआई एवं अन्य के मामले में फैसला दिया था कि विदेशी लॉ फर्में अस्थायी तौर पर यहां अपने क्लाइंटों को विदेशी कानून के बारे में सलाह दे सकती हैं। विदेशी वकील यहां अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन में भाग लेने आ सकते हैं लेकिन उन पर प्रैक्टिस करने के संबंध में बीसीआई के नियम लागू होंगे। उन्हें आर्बिट्रेशन के नियमों का भी पालन करना होगा। पीठ ने एडवोकेट्स एक्ट, 1961 के उस नियम को भी बदल दिया जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन में विदेशी वकीलों को प्रैक्टिस करने पर रोक लगाई गई थी।

भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) की दलील:

• बीसीआई ने गत 10 जनवरी को न्यायालय में दलील दी थी कि विदेशी लॉ फर्म और विदेशी वकीलों को भारत में तब तक प्रैक्टिस की अनुमति नहीं दी जा सकती जब तक वे भारतीय नियमों पर खरा नहीं उतरते.

• बीसीआई की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीयू सिंह ने मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले का पुरजोर विरोध किया था. उन्होंने दलील दी थी कि अधिवक्ता अधिनियम 1961 की शर्तों और बीसीआई के नियमों पर खरा उतरे बगैर कोई विदेशी कंपनी या वकील कानूनी वाद अथवा मध्यस्थता मामले में पेश नहीं हो सकता.

भारतीय विधिज्ञ परिषद

भारतीय विधिज्ञ परिषद एक व्यावसायिक विनियामक संस्था है जो भारत में विधिक व्यवसाय एवं विधिक शिक्षा का नियमन करती है. यह एक स्वायत्त संस्थान है.

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