सर्वोच्च न्यायालय करेगा निर्धन सामान्य वर्ग के लिए दिए गये 10% आरक्षण का परीक्षण

सर्वोच्च न्यायालय ने 103वें संवैधानिक संशोधन की संवैधानिक वैधता का परीक्षण करने के निर्णय लिया है। 103वें संवैधानिक संशोधन के अनुसार सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों को सरकारी नौकरी तथा शिक्षण संस्थानों में 10% आरक्षण की व्यवस्था की गयी थी।

103वें संवैधानिक संशोधन के विरुद्ध जनहित अभियान तथा यूथ फॉर इक्वलिटी नामक NGO तथा तहसीन पूनावाला ने याचिका दायर की थी। अब सर्वोच्च न्यायालय इस संशोधन की संवैधानिक वैधता की जांच करेगा।

इस 10% आरक्षण को कई आधारों पर चुनौती दी गयी है। मंडल केस में सर्वोच्च न्यायालय ने आर्थिक रूप से पिछड़े हुए लोगों के लिए 10% आरक्षण के प्रस्ताव को गलत ठहराया था। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि अनुच्छेद 16 (4) के मुताबिक सामाजिक पिछड़ेपन के बिना आर्थिक व शैक्षणिक पिछड़ापन आरक्षण का आधार नही बन सकता।

इंद्रा साहनी के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था थी नौकरी, शिक्षा तथा विधायिका में कुल आरक्षण 50% से अधिक नहीं हो सकता।

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