स्मार्ट वायुक्षेत्र रोधी हथियार का पोखरण में किया गया सफलतापूर्वक परीक्षण

रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी रूप से निर्मित हल्के ग्लाइड बम स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन (SAAW) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया, इसे भारतीय वायुसेना के विमान से गिराया गया। इस इस दौरान विभिन्न परिस्थितियों में 3 परीक्षण राजस्थान के पोखरण के निकट चन्दन रेंज में किये गये।

स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन (SAAW)

SAAW एंटी एयरफील्ड वेपन की श्रेणी में भारत का पहला पूर्ण स्वदेशी प्रोजेक्ट है। केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट को सितम्बर, 2013 में मंज़ूरी दी थी। इस प्रोजेक्ट पर रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन ने भारतीय वायुसेना के साथ मिलकर काम किया। इस हथियार को शीघ्र ही वायुसेना में शामिल किया जायेगा।

SAAW एक लम्बी दूरी का लम्बी रेंज एंटी-एयरफील्ड हथियार है। इसका भार 120 किलोग्राम है, यह 100 किलोमीटर तक की रेंज में अपने लक्ष्य को निपुणता से भेद सकता है। इस बम का उद्देश्य युद्ध के समय रनवे, सड़क मार्ग, एयरक्राफ्ट हैंगर तथा बंकर इत्यादि अधोसंरचना को नष्ट करना है। इस बोम्म विश्व स्तरीय हथियारों की श्रेणी में आता है। यह मिसाइल के अपेक्षा काफी सस्ता है और यह अधिक सटीकता से अपने लक्ष्य को भेद सकता है। इस भारतीय वायुसेना के मिग तथा सुखोई सु-30 जैसे एयरक्राफ्ट से दागा जा सकता है।

एंटी-एयरफील्ड हथियार  

एंटी एयरफील्ड की सहायता से दुश्मन देश की वायुसेना को काफी नुकसान पहुँचाया जा सकता है। एंटी-एयरफील्ड वेपन उच्च विस्फोट हथियार होते हैं जो रनवे तथा अन्य अधोसंरचना को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। यदि किसी रनवे पर एंटी एयरफील्ड वेपन का सफल उपयोग किया जाता है तो फिर वह रनवे किसी काम का नहीं रहता, फिर वहां से युद्धक विमान उड़ान नहीं भर सकते।

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