स्वास्थ्य मंत्रालय ने 14 स्टेरॉयड क्रीम के ओवर-द-काउंटर बिक्री पर रोक लगा दी है

14 स्टेरॉयड क्रीम की खुले में बिक्री पर स्वस्थ्य मंत्रालय ने बड़ा फैसला लेते हुए रोक लगा दी है। अब बिना डॉक्टर की पर्ची के स्टेरॉयड बेस्ड ये क्रीम नहीं बिकेंगी। इन क्रीमों से स्किन को नुकसान पहुंचता था इसलिए सरकार ने करीब 14 स्टेरॉयड वाली क्रीम की पहचान कर उन्हें शेडयूल एच की श्रेणी में डाल दिया है। इनमें कुछ प्रमुख नाम हैं यूबी फेयर, नोमार्क्स, नोस्कॉर, माय फेयर, रिंग आउट प्लस, पैनोडरम प्लस, रोल आउट है.

मुख्य तथ्य

अखबारों और टीवी में गोरा बनाने, पिंपल-रिंकल हटाने और स्किन से जुड़े इन्फेक्शन दूर करने का दावा करने वाली क्रीमों की धड़ल्ले से बिक्री पर सरकार के इस फैसले के बाद लगाम लगेगी। स्किन को सुंदर करने और इन्फेक्शन दूर करने के नाम पर बड़ी फार्मा कंपनियां स्टेरॉयड बेस्ड क्रीम बनाती हैं। ये कारोबार करीब 3,000-4,000 करोड़ रुपये का है। कुछ कंपनियां ऐसी भी हैं जो एक ब्रांड से 500 करोड़ रुपये तक कमाती हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के फैसले से फार्मा कंपनियों को नुकसान होगा लेकिन आम लोगों के फायदे में सरकार ने ये एक्शन लिया है।

शेडयूल एच ड्रग्स

शेडयूल एच औषधि और प्रसाधन सामग्री नियमों, 1945 के तहत सूचीबद्ध दवाओं का एक वर्ग है जो भारत में सभी दवाओं के निर्माण और बिक्री को नियंत्रित करता है। यह दवा के काउंटर पर योग्य डॉक्टर की पर्ची के बिना इन्हें खरीदा नहीं जा सकता है। यह डीटीएबी की सलाह पर समय-समय पर संशोधित होता रहता है ।

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