COVID-19 के एयरबोर्न और एरोसोल ट्रांसमिशन की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता: WHO

दुनिया भर में सरकारें डब्ल्यूएचओ की सिफारिशों और दिशानिर्देशों पर निर्भर हैं ताकि संक्रामक वायरस के प्रसार को रोका जा सके। Clinical Infectious Diseases Journal में वैज्ञानिकों के एक समूह द्वारा एक खुला पत्र प्रकाशित किया गया था, इसमें COVID -19 संक्रमण के खिलाफ डब्ल्यूएचओ  द्वारा जारी दिशा निर्देशों और अनुशंसाओं में संशोधन करने के लिए कहा गया है।

मुख्य बिंदु

वैज्ञानिकों के समूह ने दावा किया कि हाल के अध्ययनों में पाया गया है कि COVID -19 संक्रमण छोटे हवाई कणों के माध्यम से फैल सकता है।

WHO की सिफारिशों और दिशानिर्देशों के अनुसार, COVID -19 संक्रमण एक संक्रमित व्यक्ति के मुंह और नाक के माध्यम से निष्कासित छोटी बूंदों के रूप में फैल रहा है।

7 जुलाई, 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन  की संक्रमण रोकथाम और नियंत्रण की तकनीकी प्रमुख  मारिया वान करखोव  ने वैज्ञानिकों के समूह द्वारा किये गये दावे को  स्वीकार किया और कहा कि एयरबोर्न की संभावना या वायरस का एयरोसोल प्रसारण हो सकता है, डब्ल्यूएचओ ने भी इस तरह के साक्ष्य पाए हैं।  लेकिन जो सबूत पाए गए हैं, वे निश्चित नहीं हैं क्योंकि इस तरह के प्रसारण कुछ विशिष्ट परिस्थितियों जैसे खराब हवादार प्रणालियों में हो सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि डब्ल्यूएचओ आगामी दिनों में इसी विषय पर एक वैज्ञानिक ब्रीफिंग प्रकाशित करेगा।

डब्ल्यूएचओ को लिखा गया खुला पत्र दुनिया भर के 32 देशों के 239 वैज्ञानिकों के एक समूह द्वारा लिखा गया है।

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