CSR पर गठित उच्च स्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट वित्त मंत्री को सौंपी

कॉर्पोरेट मामले सचिव इंजेती श्रीनिवास की अध्यक्षता में CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) पर उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सौंपी है, इस समिति ने CSR पर किये जाने वाले व्यय को कर में कटौती योग्य बनाये जाने की सिफारिश की है। इस समिति ने सिफारिश की है कि जिन कंपनियों की CSR राशि 50 लाख रुपये से कम है, उन्हें CSR समिति गठित करने से छूट दी जानी चाहिए। इस समिति ने CSR नियमों का पालन न किये जाने को दीवानी अपराध घोषित करने की सिफारिश की है।

कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR)

कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी नामक पहल की शुरुआत पर्यावरण तथा सामाजिक कल्याण कार्यों में कंपनियों के स्वेच्छिक योगदान के लिए की गयी थी। इसका मुख्य सिद्धांत यह है कि कंपनियां समाज से ही आय प्राप्त करती हैं अतः उन्हें भी समाज के लिए कुछ योगदान देना चाहिए।

कंपनी अधिनियम, 2013 के सेक्शन 135 में CSR की व्यवस्था की गयी है। मौजूदा नियम के तहत CSR के बारे में निर्णय लेने की शक्ति कंपनी के बोर्ड को दी गयी है। इस नियम के अनुसार 500 करोड़ रुपये शुद्ध मूल्य अथवा 1000 करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर अथवा 5 करोड़ से अधिक शुद्ध लाभ करने वाली कंपनी को पिछले तीन वर्षों के शुद्ध लाभ के औसत का 2% CSR सम्बन्धी कार्यों के लिए खर्च करना पड़ता है। CSR गतिविधियों का वर्णन सातवीं अनुसूची में है।

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