DHRUV: DRDO ने यू.वी. आधारित सेनिटाइजर विकसित किया

रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन  (DRDO) के रिसर्च सेंटर ईमारत (RCI) ने डिफेंस रिसर्च अल्ट्रावॉयलेट सेनिटाइज़र (DHRUVS) विकसित किया है।

मुख्य बिंदु

हैदराबाद स्थित डीआरडीओ की रिसर्च सेंटर ईमारत (RCI)  ने मोबाइल फोन, लैपटॉप, आईपैड, पासबुक, चालान और कागज को सेनिटाइज़ करने के लिए एक अल्ट्रा वायलेट कैबिनेट विकसित किया है। इसका उपयोग करेंसी नोटों और कागजात को सेनिटाइज़ करने के लिए भी किया जा सकता है। यह कैबिनेट के अंदर रखी वस्तुओं में यू.वी. किरणों का 360 डिग्री एक्सपोजर प्रदान करता है।

DHRUV एक संपर्क रहित पराबैंगनी सैनिटाइजेशन कैबिनेट है जो इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को सैनिटाइज करने के लिए अत्यधिक उपयोगी है।

यू.वी. वायरस को कैसे मारता है?

COVID-19 के प्रसार के बाद, कई यू.वी. तकनीकें दैनिक उपयोग की वस्तुओं को कीटाणुरहित करने के लिए उभरी हैं। चीन में, बसों को उनके उपयोग के बाद हर रात यूवी प्रकाश प्रौद्योगिकी के साथ कीटाणुरहित किया जा रहा है।

जिस तकनीक अल्ट्रावायलेट को  कीटाणुनाशक के रूप में  उपयोग किया जाता है उसे अल्ट्रा वायलेट जर्मिसाइडल इरेडिएशन (यूवीजीआई) कहा जाता है। यू.वी. प्रकाश मनुष्यों के लिए हानिकारक होता है।

शार्ट वेवलेंथ यू.वी. आमतौर पर कीटाणुनाशक यू.वी. होते हैं। वे 200 nm और 300 nm के बीच होते हैं। वे न्यूक्लिक एसिड द्वारा अत्यधिक अवशोषित होते हैं। अवशोषित होने पर, न्यूक्लिक एसिड प्रतिकृति की अपनी क्षमता खो देते हैं। इसके अलावा, न्यूक्लिक एसिड कुछ ही समय में विघटित हो जाता है, जिससे उस जीव की मृत्यु हो जाती है।

Advertisement

Month:

Categories:

Tags: , , , , , ,