INDRA 2020: भारत-रूस अंडमान सागर में नौसैनिक अभ्यास करेंगे

भारत और रूस मलक्का के रणनीतिक जलडमरूमध्य के पास अंडमान सागर में द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास इंद्र 2020 में भाग लेंगे। यह अभ्यास  ऐसे समय में किया जा रहा है जबकि लद्दाख में चीन के साथ गतिरोध के कारण भारतीय नौसेना उच्च परिचालन अलर्ट पर है।

मुख्य बिंदु

रूस के तीन नौसैनिक जहाज 4 और 5 सितंबर को इस अभ्यास में भाग लेंगे। इस अभ्यास का समाचार भारत द्वारा रूस में आयोजित किए जाने वाले कावकाज-20 बहुराष्ट्रीय अभ्यास से हटने के ठीक बाद आया है।

भारत-अमेरिका

जुलाई 2020 में, भारतीय नौसेना ने अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस निमित्ज के साथ इसी क्षेत्र में ‘PASSEX’ अभ्यास में हिस्सा लिया था। PASSEX पैसेज एक्सरसाइज है। इसका मतलब है कि यह एक उचित पूर्व योजना के बिना अचानक व्यवस्थित किया गया था। यूएसएस निमित्ज हिंद महासागर से गुजर रहा था क्योंकि यह मलक्का जलडमरूमध्य के माध्यम से दक्षिण चीन सागर से लौट रहा था।

महत्व

भारतीय नौसेना के लिए अपने करीबी रक्षा सहयोगियों के साथ इस तरह के लगातार नौसैनिक अभ्यास में शामिल होना महत्वपूर्ण है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि हाल ही में, एंटी-पायरेसी पैट्रोल के नाम पर क्षेत्र में चीनी नौसेना की उपस्थिति बढ़ी है।

अंडमान क्यों महत्वपूर्ण है?

अंडमान के क्षेत्र के माध्यम से प्रत्येक वर्ष 60,000 से अधिक वाणिज्यिक जहाज गुजरते हैं। चीन इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है। इस क्षेत्र में मछली पकड़ने वाली नौकाओं के रूप में चीनी नौसेना के जहाजों को भेजा जाता है। वे पाकिस्तान और श्रीलंका की बंदरगाह यात्राओं के नाम पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह को चीन को 99 वर्षों के लिए पट्टे पर दिया गया है जिसे चीन एक नौसैनिक अड्डे के रूप में विकसित कर रहा है। इसी तरह चीन पाकिस्तान में ग्वादर बंदरगाह बना रहा है।

कार्गो वॉल्यूम के आधार पर, दुनिया के शीर्ष दस बंदरगाहों में से सात बंदरगाह चीन में है। इसलिए, आर्थिक और सुरक्षा उपायों को बढ़ावा देने के लिए अपनी नौसैनिक उपस्थिति को मजबूत करना भारत के लिए महत्वपूर्ण है।

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