INS विक्रमादित्य में पहली बार लगाये जायेंगे मरीन हाइड्रोलिक सिस्टम

भारत के एकमात्र एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रमादित्य में पहली बार मरीन हाइड्रोलिक सिस्टम का उपयोग किया जायेगा, इससे विक्रमादित्य की कार्य क्षमता में वृद्धि होगी। इसमें GS-1MF और GS-3 हाइड्रोलिक सिस्टम का उपयोग किया जायेगा।

मुख्य बिंदु

GS-1MF और GS-3 का उपयोग एयरक्राफ्ट और हेलीकाप्टर में इंधन भरने, सफाई करने तथा इनके हाइड्रोलिक सिस्टम को प्रेशराइज करने में किया जायेगा। GS-1MF हाइड्रोलिक सिस्टम का उपयोग हेलीकाप्टर के लिए किया जायेगा जबकि GS-3 हाइड्रोलिक सिस्टम का उपयोग एयरक्राफ्ट के लिए किया जायेगा। विक्रमादित्य में यह अपग्रेड व ट्रायल के कार्य भारत में ही किया जाएगा।

यह सिस्टम रूस की रोस्तेक कंपनी की सब्सिडियरी टेक्नोडायनामिका द्वारा मई, 2019 तक किया जायेगा। टेक्नोडायनामिका नागरिक व सैन्य एयरक्राफ्ट में सर्विसिंग का कार्य करती है।

आईएनएस विक्रमादित्य  

आईएनएस विक्रमादित्य भारतीय नौसेना का सबसे शक्तिशाली एयरक्राफ्ट कैरियर है। इसका निर्माण 1987 में किया गया था, इसके सोवियत नौसेना में बाकू नाम से कार्य किया है। बाद में रूसी नौसेना में इसका नाम एडमिरल गोर्शकोव रखा गया। भारत में 2004 में इसे रूस से 2.3 अरब डॉलर की लागत से खरीदा। इसे भारतीय नौसेना में नवम्बर, 2013 में कमीशन किया गया था।

आईएनएस विक्रमादित्य का डिजाईन कीव श्रेणी के एयरक्राफ्ट कैरियर पर आधारित है। यह 284 मीटर लम्बा और  60 मीटर चौड़ा है। इसका भार लगभग 40,000 टन है, यह भारतीय नौसेना का सबसे बड़ा तथा भारी पोत है। इसके एयर विंग में 30 मिग 29K लड़ाकू विमान तथा 6 कामोव हेलीकाप्टर शामिल हैं।

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